हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा नीट प्रश्नपत्र लीक के मामले को बुरी तरह से संभालने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी के साथ-साथ हजारों छात्रों द्वारा किए गए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने मोदी की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाला है और उनकी लोकप्रियता रेटिंग को बहुत हद तक कम कर दिया है। यह घटना न केवल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह देश की शिक्षा प्रणाली की गंभीर समस्याओं को भी उजागर करती है।

इस मामले में सरकार की चुप्पी और प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुए दुर्व्यवहार ने देश के नागरिकों में आक्रोश और असंतुष्टता की भावना पैदा की है। यह घटना न केवल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह देश की शिक्षा प्रणाली की गंभीर समस्याओं को भी उजागर करती है। सरकार को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और दोषियों को सजा दिलानी चाहिए।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार वास्तव में छात्रों के भविष्य के बारे में चिंतित है या यह सिर्फ एक राजनीतिक खेल है। सरकार को छात्रों की मांगों को सुनना चाहिए और उनके भविष्य के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। यह समय है जब सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और देश की शिक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए काम करना चाहिए।