विपक्षी नेताओं ने शनिवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन हटाने की निंदा की, जो अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन थे। उन्होंने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को कम करने, असहमति को दबाने और संवाद के बजाय बल का उपयोग करने का आरोप लगाया।
विपक्षी दलों ने एक स्वर में वांगचुक के साथ एकजुटता व्यक्त की और केंद्र सरकार से उनकी मांगों पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वांगचुक को जबरन हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और यह देश में बढ़ती असहमति को दबाने की कोशिश है।
विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि वांगचुक की मांगें जायज हैं और उन्हें सरकार द्वारा सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को वांगचुक के साथ बातचीत करनी चाहिए और उनकी मांगों पर ध्यान देना चाहिए। विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि वे वांगचुक के साथ खड़े हैं और उनकी लड़ाई में उनका साथ देंगे।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है और उन्होंने केंद्र सरकार से वांगचुक की मांगों पर ध्यान देने का आग्रह किया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई करती है और वांगचुक की मांगों को कैसे संबोधित करती है।

