सीपीआई के महासचिव डी. राजा ने 1 सितंबर को आयोजित होने वाली रैली से पहले कहा कि वर्तमान आर्थिक स्थिति में गिरावट और बेरोज़गारी की बढ़ती दर सरकार की नीतियों की विफलता को दर्शाती है। उन्होंने समकालिक चुनावों के प्रस्ताव को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा बताया और एक वैकल्पिक राजनीतिक दिशा की मांग की।

यह टिप्पणी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रासंगिक है, जहाँ कांग्रेस सदस्य रो खन्ना ने हाल ही में अमेरिकी-भारतीय संबंधों के 30‑वर्षीय न्यूनतम स्तर की ओर इशारा किया था। इसी प्रकार, गोवा में जमा वापसी योजना के कार्यान्वयन में देरी के बाद सितंबर से शराब एवं अन्य वस्तुओं पर इस योजना को लागू किया जाएगा, जो सरकार की सामाजिक नीतियों में बदलाव का संकेत देता है।

इसके अतिरिक्त, कई बीजेडपी‑शासित राज्यों ने नई ग्रामीण रोजगार योजना वीबी‑जी राम जी के जुलाई‑एक प्रारंभ से पहले ही चिंताएँ जताई हैं। इन सभी घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि मौजूदा नीतियों में सुधार और एक सुदृढ़ वैकल्पिक मंच की आवश्यकता अत्यंत आवश्यक है।