ओडिशा के अधिकार पैनल ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसमें अनाथालयों और बाल देखभाल संस्थानों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि अभिभावक रहित बच्चों के प्रमाणपत्रों में सही अभिभावक के नाम दर्ज हों। कई मामलों में यह पाया गया कि संस्थानों ने बच्चों के लिए काल्पनिक अभिभावक नामों का प्रयोग किया, जिससे वे सरकारी छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य लाभ और अन्य सामाजिक योजनाओं से वंचित रह गए। पैनल ने कहा कि इस प्रकार की त्रुटि न केवल बच्चों के भविष्य को प्रभावित करती है, बल्कि राज्य की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को भी धूमिल करती है।
पिछले कुछ महीनों में ओडिशा में कई सामाजिक समस्याओं ने सार्वजनिक ध्यान आकर्षित किया है, जैसे कि उमेर्कोटे में चार साल की बच्ची की दुखद मृत्यु और तेल व गैस कंपनियों के बड़े नुकसान। इन घटनाओं ने राज्य में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को और तीव्र कर दिया है। इसी संदर्भ में अधिकार पैनल ने कहा कि अभिभावक रहित बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त निगरानी आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।
जाँच के दौरान पैनल ने सभी संबंधित संस्थानों से दस्तावेज़ी साक्ष्य और बच्चों के अभिभावक संबंधी जानकारी प्रदान करने का आदेश दिया है। यदि किसी संस्थान ने जानबूझकर गलत जानकारी दी, तो उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पहल से आशा की जा रही है कि अभिभावक रहित बच्चों को उनके वास्तविक अधिकार मिलेंगे और वे सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ उठा सकेंगे, जिससे उनका शैक्षणिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित हो सकेगा।

