राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित द्वाल के बीजिंग दौरे ने भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ स्थापित किया है। यह यात्रा भारत द्वारा सितम्बर में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से कुछ हफ्ते पहले हुई, जिससे यह संकेत मिलता है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात वर्षों बाद पहली बार भारत की धरती पर कदम रखने की तैयारी में हैं। द्वाल ने इस अवसर को दोनों देशों के रणनीतिक संवाद को गहरा करने और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए उपयोग करने का इरादा जताया।
द्वाल ने पिछले दिनों ब्रिक्स को "विशेष गठबंधन" कहकर उसकी बढ़ती महत्ता को उजागर किया और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज के खुलने को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को सुदृढ़ करना आवश्यक है, जिससे विश्व बाजार में स्थिरता बनी रहे। इन बयानों ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की सक्रिय भूमिका को पुनः स्थापित किया।
इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेशेल्स में स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेना भी भारत की वैश्विक कूटनीति को उजागर करता है। यह समारोह भारत-सेशेल्स संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ भारत की समुद्री सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को भी बल देता है। इन सभी घटनाओं से स्पष्ट है कि भारत अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपने हितों की रक्षा और सहयोग को बढ़ाने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।

