अखिलेश यादव ने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा में “२५ पैसे” कहकर जाट समुदाय को निशाना बनाया, जिससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक दल (आरएलडी) के प्रमुख जयंत चौधरी ने तीखा विरोध किया। जयंत ने कहा कि यदि राजनीतिक लड़ाई में सस्ते शब्दों का प्रयोग करना ही है, तो वह मेरे नाम से ही कर सकते थे, लेकिन इस तरह की टिप्पणी से समुदाय की भावना ठेस पहुँचती है। उन्होंने यह भी कहा कि जाटों को “एबीसीडी” सिखाने का आरोप निराधार है।

इस टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश की सामाजिक नेता मायावती ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश से सार्वजनिक माफी की माँग की। मायावती ने कहा कि इस प्रकार की असंवेदनशील भाषा से सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचता है और राजनीति को जिम्मेदार बनना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों दलों को मिलकर संवाद स्थापित करना चाहिए।

पिछले हफ्ते अखिलेश ने बीजेपी को उत्तर प्रदेश में कागज लीक के लिए दोषी ठहराया था, जिससे पार्टी के बीच तनाव बढ़ गया था। साथ ही, अमेरिकी‑ईरान तनाव के कारण रुपये में गिरावट देखी गई, जिससे आर्थिक माहौल भी अस्थिर हो गया। इन सभी घटनाओं ने राजनीतिक परिदृश्य को और अधिक जटिल बना दिया है, जहाँ आर्थिक और सामाजिक दोनों पहलुओं पर असर पड़ रहा है।