न्यू यॉर्क पुलिस विभाग की आतंकविरोधी इकाई ने जनवरी में एक आंतरिक ज्ञापन जारी किया, जिसमें मेटा के रे‑बैन् स्मार्ट चश्मे को संभावित ‘सुरक्षा और गुप्तचर’ खतरे के रूप में पहचाना गया। इस ज्ञापन में अधिकारियों को जेल के भीतर सभी चश्मों की जाँच करने का निर्देश दिया गया, क्योंकि इन चश्मों में छोटे कैमरा और माइक्रोफ़ोन लगे होते हैं, जो बिना अनुमति के रिकॉर्डिंग कर सकते हैं। ज्ञापन में दो उदाहरणों का उल्लेख किया गया, जहाँ सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो प्रकाशित हुए थे, जो पुलिस सुविधाओं के अंदर छिपी रिकॉर्डिंग दर्शाते थे।

यह चिंता केवल न्यू यॉर्क तक सीमित नहीं है; मेन, कैलिफ़ोर्निया और अन्य कई राज्य पुलिस विभागों ने भी समान चेतावनी जारी की है। वे इस बात से डरते हैं कि गिरफ्तारियों के दौरान या जेल में बंदियों द्वारा इन चश्मों का उपयोग करके पुलिस की कार्यवाही, रणनीति या व्यक्तिगत जानकारी को चुपके से रिकॉर्ड किया जा सकता है। साथ ही, इस तकनीक का दुरुपयोग आतंकवादी गतिविधियों में भी हो सकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को नया जोखिम उत्पन्न हो सकता है।

वहीं, देश में स्मार्ट तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने वाले कई सकारात्मक पहलें भी चल रही हैं। कायरन स्मार्ट सर्विसेज ने विविधता और समावेशन के क्षेत्र में पुरस्कार जीतकर यह सिद्ध किया है कि तकनीक सामाजिक परिवर्तन में योगदान दे सकती है। भुवनेश्वर नगर निगम ने हरित गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले स्मार्ट बेंच स्थापित किए हैं, जबकि ओडिशा के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला ने दर्द कम करने और संक्रमण रोकने वाला स्मार्ट घाव पट्टी विकसित किया है। इन उदाहरणों के बीच, मेटा के स्मार्ट चश्मे जैसी निगरानी तकनीक का दुरुपयोग सार्वजनिक भरोसे को कमजोर कर सकता है, इसलिए नियामक और सुरक्षा एजेंसियों को इस पर कड़ी निगरानी रखनी आवश्यक है।