ज़ोमी फ्रैंककम, जो ऑस्ट्रेलिया की एक मानवीय सहायता संस्था में कार्यरत थीं, को इज़राइल के एक ड्रोन हमले में मार दिया गया। इज़राइल रक्षा बल ने इस हत्या की आपराधिक जांच न करने का निर्णय लिया, जिससे फ्रैंककम के परिवार ने इसे ‘अपमान’ कहा और सरकार से साक्ष्य की पूर्णता की माँग की। परिवार ने कहा कि इस तरह का निर्णय न केवल पीड़ित के अधिकारों की अनदेखी है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन को भी दर्शाता है।
ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेननी वोंग ने इज़राइल के राजदूत को बुलाकर इस निर्णय पर तीखा विरोध व्यक्त किया, जबकि प्रधान मंत्री एंथोनी अल्बानिज़े ने ‘क्रोध’ शब्द का प्रयोग कर इस मामले में न्याय की मांग की। उन्होंने इज़राइल को सभी उपलब्ध साक्ष्य, विशेषकर ड्रोन के ऑडियो रिकॉर्ड, प्रदान करने का आग्रह किया, ताकि अंतर्राष्ट्रीय जांच संभव हो सके। इस प्रकार की कूटनीतिक टकराव पहले भी देखी गई हैं, जैसे कि पिछले महीने के ट्राइबली परिवार के लिए खनन से जुड़ी सरकारी नीतियों पर हुई बहस।
पिछले कुछ हफ्तों में विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी नीतियों की आलोचना तेज़ी से बढ़ी है। जम्मू-कश्मीर में साजिद लोने ने अनसारी परिवार पर हुए हमले की निंदा की, और हैदराबाद में केटीआर ने कांग्रेस सरकार द्वारा भूमि शीर्षक रद्द करने की योजना को गरीब परिवारों के विस्थापन के रूप में आलोचना की। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि जब भी नागरिकों के अधिकारों को खतरा होता है, तो सामाजिक और राजनीतिक दबाव सरकारों को जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ज़ोमी फ्रैंककम के मामले में भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की आवाज़ और परिवार की दृढ़ता से उम्मीद है कि न्याय शीघ्र ही प्राप्त होगा।

