भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यह स्पष्ट किया कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बल्कि विश्व भर में खाद्य आपूर्ति की निरंतरता के लिए भी अनिवार्य है। वर्तमान संघर्षों से उत्पन्न खाद्य असुरक्षा मानवीय संकट का एक प्रमुख पहलू बन गई है, और समुद्री मार्गों में व्यवधान से इस संकट की तीव्रता बढ़ रही है। इसलिए भारत ने सभी सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे मिलकर इन जलमार्गों की रक्षा के लिए सामूहिक रणनीति तैयार करें और लागू करें।

पिछले कुछ हफ्तों में ओडिया समुदाय द्वारा इस्कॉन के रथ यात्रा के विरोध, आईपीएल सितारे के रसोइए पर हिंसा का मामला और गुवाहाटी हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत जैसी घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को और स्पष्ट करती हैं। ओडिया समुदाय ने यूनेस्को से संरक्षण की मांग की, जिससे सांस्कृतिक संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश पड़ा। इसी प्रकार, आईपीएल खिलाड़ी के रसोइए ने कार्यस्थल में हिंसा की शिकायत की, जिससे खेल जगत में सुरक्षा और मानवीय अधिकारों की चर्चा बढ़ी।

इन विविध घटनाओं के बीच भारत ने समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर सहयोग के बिना कोई भी समाधान स्थायी नहीं हो सकता। समुद्री मार्गों की सुरक्षा से न केवल खाद्य आपूर्ति बल्कि ऊर्जा, कच्चे माल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही भी सुरक्षित रहती है। इस कारण, भारत ने सभी राष्ट्रों से अपील की कि वे संयुक्त रूप से समुद्री सुरक्षा के लिए नियम बनाएं, निगरानी को सुदृढ़ करें और संभावित खतरों को रोकने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करें।