राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के न्यायालय के बाहर कई अधिवक्ताओं ने एकत्रित होकर लंबी अवधि का धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने न्यायालय के प्रवेश द्वार पर बैठकर न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और न्यायाधीश शर्मा के विरुद्ध लगाए गए गंभीर आरोपों की त्वरित जांच की मांग की। इस प्रदर्शन में कई वरिष्ठ व युवा वकीलों ने भाग लिया, जो न्यायिक प्रणाली में विश्वास की कमी को दूर करने के लिए एकजुट हुए।

यह कदम सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता द्वारा मुख्य न्यायाधीश भारत सूर्य कांत को लिखे तीन पत्रों के बाद आया, जिनमें उन्होंने न्यायाधीश शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोपों को उजागर किया और उनके स्थानांतरण की अपील की। इस संदर्भ में, पिछले सप्ताह राजस्थान में सीईटी परीक्षा की तिथियों की घोषणा ने प्रशासनिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया था, जबकि अयोध्या में राम मंदिर दान मामले पर अधिवक्ता सभा ने न्यायिक जांच की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसी प्रकार केरल में बाल शोषण के आरोपों पर बीजेडपी कार्यकर्ताओं के विरोध ने सामाजिक न्याय के मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर लाया, जिससे इस धरने की पृष्ठभूमि और भी स्पष्ट हुई।

धरने के बाद न्यायिक प्राधिकरण ने स्थिति पर विचार करने का आश्वासन दिया और न्यायाधीश शर्मा के खिलाफ जांच प्रक्रिया को तेज करने का संकेत दिया। जनता और मीडिया ने इस आंदोलन को सकारात्मक रूप से देखा, क्योंकि यह न्यायिक प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। आगे की कार्रवाई में न्यायालय के भीतर पारदर्शी प्रक्रियाओं की स्थापना, अधिवक्ताओं के साथ संवाद और न्यायिक निर्णयों की विश्वसनीयता को बढ़ाने के उपाय शामिल हो सकते हैं।