राम माधव ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर कहा कि भाजपा का सबसे बड़ा विरोधी स्वयं पार्टी है, क्योंकि उसके भीतर विचारधारा की अति‑आत्मविश्वास और आंतरिक टकराव की भावना व्याप्त है। उन्होंने यह टिप्पणी पिछले सप्ताह कोलंबो में हुए भारत‑पाकिस्तान ट्रैक‑२ वार्ता के बारे में मीडिया रिपोर्ट को खारिज करने के बाद की, जिससे पार्टी के भीतर संवाद और रणनीति पर सवाल उठे।

माधव ने यह भी कहा कि आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही कांग्रेस की विचारधारा को सबसे बड़ा चुनौती दे रहा है, क्योंकि वह सामाजिक‑राजनीतिक मुद्दों पर अधिक सक्रिय और प्रभावशाली हो गया है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि हिन्दू ग्रंथों को विशेष महत्व देते हुए कुरान और बाइबिल को नज़रअंदाज़ करना anti‑Hindu पक्षपात को दर्शाता है, जिससे धार्मिक संतुलन बिगड़ रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने पार्टी के भीतर विविध विचारों को समेटने की आवश्यकता पर बल दिया।

अंत में, राम माधव ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा जम्मू‑कश्मीर में राज्य की स्थिति बहाल करने के वादे को दोहराया, यह कहते हुए कि यह वादा पार्टी की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा कि यदि यह वादा पूरा नहीं हुआ तो यह भाजपा के लिए ही बड़ी चुनौती बन जाएगी। इस बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि भाजपा को अपने भीतर की विचारधारा और बाहरी चुनौतियों दोनों को संतुलित करना होगा, ताकि वह राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ बनाए रख सके।