नई दिल्ली। देश में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक महत्वपूर्ण दवा की पिछले करीब दो सप्ताह से कमी की खबरों ने मरीजों और डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। कई प्रमुख अस्पतालों और कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि दवा की उपलब्धता प्रभावित होने से मरीजों के उपचार कार्यक्रम पर असर पड़ सकता है।

डॉक्टरों के अनुसार, कैंसर के कई मामलों में उपचार निर्धारित समय पर देना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में दवा की कमी के कारण उपचार में देरी होने से मरीजों की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों ने सरकार और संबंधित दवा कंपनियों से जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिकता होनी चाहिए।

अस्पतालों का कहना है कि वे वैकल्पिक व्यवस्थाओं और उपलब्ध स्टॉक के जरिए मरीजों को राहत देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो समस्या और गंभीर हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि देश में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत बनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके। फिलहाल मरीजों और उनके परिजनों की नजर इस बात पर टिकी है कि दवा की नियमित आपूर्ति कब तक बहाल हो पाती है।