अध्ययन के प्रमुख लेखक बताते हैं कि यूरोप में वनाग्नि की संभावना में वृद्धि का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न हो रहे गर्म, शुष्क और तेज़ हवाओं का संयोजन है। यह वही परिस्थितियाँ हैं जिन्होंने हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के यूटाह‑कोलोराडो में भी घातक वनाग्नि को जन्म दिया, जहाँ तीन अग्निशामक मारे गए और दो घायल हुए। यूरोप में भी इसी तरह की जलवायु स्थितियों ने गर्मी की लहर को तीव्र किया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ा और कई देशों में यात्रा व्यवधान उत्पन्न हुआ।

यूरोप में दर्ज की गई रिकॉर्ड गर्मी ने पहले ही 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतों का कारण बना दिया है, जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया। इस प्रकार की असामान्य गर्मी ने वनाग्नि के जोखिम को और बढ़ा दिया है, क्योंकि सूखे की स्थिति में वनस्पति आसानी से जलने लगती है। अध्ययन में यह भी उजागर किया गया है कि यदि जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए सर्वश्रेष्ठ उपाय अपनाए जाएँ, तो भी वनाग्नि के क्षेत्र में 39 % की वृद्धि अनिवार्य है, जब तक कि आग प्रबंधन में पर्याप्त सुधार न किया जाए।

लेखकों ने कहा है कि प्रभावी आग प्रबंधन रणनीतियों को लागू करने से इस वृद्धि को 70 % से अधिक तक घटाया जा सकता है। इसमें तेज़ प्रतिक्रिया प्रणाली, बेहतर निगरानी, और स्थानीय समुदायों की भागीदारी शामिल है। यदि ये कदम तुरंत उठाए जाएँ, तो यूरोप में भविष्य में वनाग्नि के कारण होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है, और जलवायु परिवर्तन के अन्य प्रभावों को भी कम किया जा सकता है।