ब्रिटेन में मधुमक्खी पालकों ने एशियाई हॉर्नेट के खतरे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान की मांग की है। यह पीला‑टाँगा हॉर्नेट दक्षिण‑पूर्व एशिया का मूल निवासी है, जिसे पहली बार 2004 में यूरोप में दर्ज किया गया था और तब से यह गर्मियों की बढ़ती गर्मी से लाभान्वित होकर तेजी से फैल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रजाति के आक्रमण से परागणकर्ता क्षेत्रों में ‘परागणकर्ता मरुस्थल’ बन सकता है, जिससे फसलों की उपज घटेगी और खाद्य सुरक्षा को बड़ा खतरा होगा।

पिछले कुछ हफ्तों में एशिया से जुड़े विभिन्न आर्थिक और खेल समाचारों ने इस प्रजाति के प्रसार को और अधिक उजागर किया है। उदाहरण के तौर पर, 21 जून को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया था कि कई प्रमुख कंपनियों के रिकॉर्ड तिथियों में बदलाव हो रहा है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहना पड़ रहा है। इसी समय एशियाई स्क्वैश चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता ने एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती रुचि को दर्शाया। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया कि एशिया से जुड़े मुद्दे वैश्विक स्तर पर कितने महत्वपूर्ण हो रहे हैं, और एशियाई हॉर्नेट का प्रसार भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

मधुमक्खी पालकों ने सरकार से अनुरोध किया है कि वे एशियाई हॉर्नेट की पहचान, निगरानी और नियंत्रण के लिए व्यापक जागरूकता कार्यक्रम शुरू करें। इस कार्यक्रम में किसानों, शहरी निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों को इस आक्रमणकारी प्रजाति के लक्षणों और रोकथाम के उपायों के बारे में शिक्षित किया जाएगा। साथ ही, वैज्ञानिक संस्थानों को इस पर शोध करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में संभावित प्रकोपों को पहले से ही रोका जा सके। इस प्रकार का राष्ट्रीय अभियान न केवल मधुमक्खी पालन को बचाएगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा।