कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण में शुल्क जमा करने के बाद कई प्रथम वर्ष छात्रों ने अपने सीट पुष्टि पत्र को डाउनलोड कर निर्धारित कॉलेजों में प्रवेश करने का प्रयास किया, परन्तु वह परिसर अस्तित्वहीन पाया गया। छात्रों ने बताया कि वे जिस पते पर पहुँचे, वहाँ न तो भवन था न ही कोई प्रशासनिक कार्यवाही। इस प्रकार की धोखाधड़ी ने न केवल उनके शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित किया, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ा दिया।
ऐसी घटनाएँ शिक्षा क्षेत्र में नियामक संस्थाओं की निगरानी की कमी को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। पिछले महीने आर्यन समूह ने एआईसीटीई के निर्देशानुसार मानवीय मूल्यों पर एक वेबिनार आयोजित किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि संस्थानों को नैतिक मूल्यों के साथ-साथ पारदर्शिता भी अपनानी चाहिए। इसी प्रकार, ओडिशा में महा नदी में तीन छात्रों के लापता होने की त्रासदी ने छात्र सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया, जबकि कनाडा में एक बच्चे की दुर्लभ बीमारी ने स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को उजागर किया।
इन घटनाओं के प्रकाश में, शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह कॉलेजों की प्रमाणिकता की कठोर जाँच करे और छात्रों को सही जानकारी प्रदान करने के लिए एक सुदृढ़ ऑनलाइन पोर्टल स्थापित करे। साथ ही, छात्रों को सलाह दी जानी चाहिए कि वे आधिकारिक स्रोतों से ही प्रवेश संबंधी दस्तावेज़ प्राप्त करें और किसी भी अनियमितता की तुरंत रिपोर्ट करें। इस प्रकार, नियामक उपायों और जागरूकता के माध्यम से भविष्य में ऐसी ‘गायब’ कॉलेजों की समस्या को रोका जा सकता है।

