विदेश सचिव के रूप में पहली बार संसद में बोलते हुए एड मिलिबैंड ने ब्रिटेन की इज़राइल नीति को "विस्तृत रीसेट" करने का वादा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिटिश कंपनियों को वेस्ट बैंक में अवैध वसाहतियों के निर्माण में भागीदारी से रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। इस कदम को उन्होंने क्षेत्रीय शांति और मानवीय अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक बताया।

वेस्ट बैंक में प्रस्तावित ई‑वन योजना, जो क्षेत्र को दो हिस्सों में विभाजित करने की संभावना रखती है, को रोकने के लिए मिलिबैंड ने विशेष उपायों की घोषणा की। इस प्रकार की नीति परिवर्तन की तुलना हाल ही में जम्मू और कश्मीर में लागू किए गए फैकल्टी ट्रांसफर नीति और किराया‑लीज़ नीति के मसौदे से की जा सकती है, जहाँ सरकार ने भी मौजूदा ढांचों को पुनः व्यवस्थित करने का प्रयास किया। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न देशों में नीति पुनर्संरचना का चलन बढ़ रहा है।

इस घोषणा पर विभिन्न राजनीतिक दलों और मानवाधिकार संगठनों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएँ व्यक्त कीं। कुछ ने इसे सकारात्मक कदम कहा, जबकि अन्य ने इसे पर्याप्त नहीं मानते हुए अधिक ठोस कार्यवाही की मांग की। मिलिबैंड ने आगे कहा कि वे संसद के साथ मिलकर विस्तृत विधायी उपाय तैयार करेंगे, जिससे ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के साथ सामंजस्य स्थापित हो सके।