सुपरिंटेंडेंट हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को एरूर‑एडाप्पली एनएच 66 बायपास पर मौजूद गड्ढों को तुरंत पुनः पक्की करने का आदेश दिया। यह आदेश समाचार पत्रों में प्रकाशित बायपास की गंभीर स्थिति के आधार पर स्वयं‑मोटु मामले के रूप में दायर किया गया था। कोर्ट ने जिला कलेक्टर, कार्यकारी अभियंता तथा संबंधित विभागों को अक्टूबर के पहले सप्ताह तक कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इस आदेश से पहले चेन्नई‑तिरुचिरापल्ली हाईवे पर कावेरी पुल की मरम्मत और एनएच‑44 पर अमरनाथ यात्रा से पहले तेज़ी से मरम्मत कार्यों की पृष्ठभूमि को भी ध्यान में रखा गया।
एनएचएआई ने पहले भी कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर मरम्मत कार्यों में देरी और पारदर्शिता की कमी के कारण आलोचना झेली है। जुलाई में जारी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एनएचएआई ने अनुबंध संबंधी जानकारी सार्वजनिक नहीं की, जिससे सार्वजनिक भरोसा घटा। एरूर‑एडाप्पली बायपास की स्थिति भी इसी प्रकार की लापरवाही का परिणाम थी, जहाँ यात्रियों को लगातार गड्ढों के कारण असुविधा और सुरक्षा जोखिम का सामना करना पड़ रहा था। इस संदर्भ में कोर्ट ने तत्काल कार्यवाही की मांग की, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्य योजना तैयार की है, जिसमें मौजूदा गड्ढों की पहचान, आवश्यक सामग्री की खरीद और कार्य दलों की तैनाती शामिल है। यदि निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा नहीं हुआ तो कोर्ट अतिरिक्त दंडात्मक उपायों पर विचार कर सकता है। यह कदम न केवल बायपास की सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के रख‑रखाव में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी सुदृढ़ करेगा।

