शिरसे ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में ११०मीटर हर्डल्स के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रचा। उन्होंने १३.७६ सेकंड के समय के साथ फाइनल में जगह बनाई। लेकिन भारी तौर पर पट्टी बंधे पैर के साथ दौड़ते हुए शिरसे आठ प्रतिभागियों के मैदान में आखिरी स्थान पर रहे, उन्होंने १५.३९ सेकंड का समय लिया और दर्द से कराहते हुए फिनिश लाइन पार की।

शिरसे की यह चोट कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान हुई थी, जब वे फाइनल में दौड़ रहे थे। इसके बाद से वे अपने पैर के फ्रैक्चर का इलाज करवा रहे हैं और एशियाई खेलों में भाग लेने के लिए तैयार नहीं हैं।

एशियाई खेलों में भारतीय हर्डलर्स की टीम में शिरसे की अनुपस्थिति महसूस की जाएगी, लेकिन उम्मीद है कि वे जल्द ही पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे और फिर से दौड़ में उतरेंगे। शिरसे की यह चोट न केवल उन्हें बल्कि पूरे देश को निराश कर गई है, लेकिन हमें उम्मीद है कि वे जल्द ही वापसी करेंगे और अपने देश को गौरवान्वित करेंगे।

शिरसे की चोट के कारण भारतीय हर्डलर्स की टीम को एशियाई खेलों में थोड़ी मुश्किल हो सकती है, लेकिन हमें उम्मीद है कि अन्य प्रतिभागी अच्छा प्रदर्शन करेंगे और देश को गर्व कराएंगे। शिरसे की अनुपस्थिति में भारतीय टीम को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन हमें विश्वास है कि वे इन चुनौतियों का सामना करेंगे और अच्छा प्रदर्शन करेंगे।