नई दिल्ली। भारत में इजरायल के राजदूत रियुवेन अजार (Reuven Azar) ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच किसी भी तरह की दरार की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच मतभेदों की अटकलें लगाने वाले लोगों को अभी "थोड़ा और इंतजार करना होगा"।
पीटीआई वीडियो को दिए एक इंटरव्यू में अजार ने कहा कि लेबनान में सैन्य अभियानों को लेकर नेतन्याहू और ट्रंप के बीच कथित तीखी बातचीत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। उन्होंने इसे "मैत्रीपूर्ण रणनीतिक मतभेद" बताया और कहा कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से इन घटनाओं की अलग व्याख्या कर रहे हैं।
राजदूत के अनुसार, दोनों नेताओं की कार्यशैली और व्यक्तित्व अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इससे उनके रणनीतिक संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से कई लोग ट्रंप और नेतन्याहू के बीच दरार तलाश रहे हैं, लेकिन अब तक ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला है।
हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में स्वीकार किया था कि वह लेबनान को लेकर जारी संघर्ष से कुछ हद तक नाराज थे। एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि वह नेतन्याहू की लगातार सैन्य कार्रवाई से "परेशान" थे, हालांकि उन्होंने इसे गंभीर नाराजगी नहीं बताया।
इसके बावजूद अजार ने जोर देकर कहा कि इजरायल और अमेरिका का प्रमुख लक्ष्य एक ही है—ईरान को सैन्य परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने हाल ही में पहली बार संयुक्त सैन्य अभियान भी चलाया, जो उनकी मजबूत साझेदारी को दर्शाता है।
राजदूत ने कहा कि रणनीति और तरीकों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान के मुद्दे पर एक समान सोच रखते हैं। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता को दो अनुभवी वार्ताकारों के बीच की प्रतिस्पर्धा बताया, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे से बेहतर रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत को लेकर सामने आने वाली हर रिपोर्ट के आधार पर जल्दबाजी में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। उनके अनुसार, धैर्य और निरंतर प्रयास से अंततः समाधान का रास्ता निकल सकता है।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देशों की ओर से वार्ता की स्थिति पर अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। जहां ईरान के कुछ अधिकारियों ने बातचीत में ठहराव के संकेत दिए हैं, वहीं ट्रंप प्रशासन लगातार कह रहा है कि कूटनीतिक प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
