वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रकाशित कोर उद्योग सूचकांक के अनुसार, जुलाई २०२६ में कोर सेक्टरों की समग्र वृद्धि दर पाँच दशमलव चार प्रतिशत रही। यह दर पिछले छह महीनों में देखी गई सबसे धीमी गति है, जबकि पहले के महीनों में यह दर सात में से दूसरी सबसे तेज़ थी। कोर सेक्टरों में उत्पादन, खनन, बिजली, गैस और जल आपूर्ति जैसे प्रमुख आर्थिक घटक शामिल हैं, जिनकी मंदी सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर असर डालती है।

पिछले महीनों की रिपोर्टों से पता चलता है कि कई राज्य सरकारों ने सामाजिक क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च बढ़ाया है, जबकि कृषि और सिंचाई जैसे आर्थिक क्षेत्रों में निवेश में कमी आई है। विशेषकर जून में दर्ज अत्यंत कम वर्षा ने कृषि उत्पादन को प्रभावित किया, जिससे ग्रामीण आय में गिरावट आई और उपभोक्ता खर्च में भी कमी आई। इस संदर्भ में, यूके में बढ़ती महंगाई और कर परिवर्तन के कारण घरों की खर्च करने की क्षमता घटने की खबरें भी इस आर्थिक मंदी को और स्पष्ट करती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस धीमी गति को उलटने के लिए वित्तीय नीति में लक्षित प्रोत्साहन और निवेश को पुनः सक्रिय करना आवश्यक होगा। कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, उद्योगों में तकनीकी उन्नयन और उपभोक्ता विश्वास को बढ़ाने के लिए कर राहत जैसे कदम प्रभावी हो सकते हैं। साथ ही, राज्य सरकारों को सामाजिक खर्च के साथ-साथ उत्पादन‑उन्मुख क्षेत्रों में भी संतुलित निवेश करना चाहिए, ताकि समग्र आर्थिक विकास की गति पुनः तेज हो सके।