जेम्स क्लाइबर्न ने अपने हालिया बयान में स्पष्ट किया कि 1991 के पुष्टि सुनवाई के दौरान क्लेरेंस थॉमस को समर्थन देना उनका एक गंभीर त्रुटि था। उस समय उन्होंने थॉमस को "व्यक्तिगत और पेशेवर मित्र" कहा था और आशा जताई थी कि वह अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुदृढ़ करेंगे। परन्तु अब क्लाइबर्न का मानना है कि थॉमस ने अपने सिद्धांतों को त्याग कर दायें‑पक्षीय कट्टरता की ओर रुख किया है, जिससे न्यायपालिका में संतुलन बिगड़ गया है।
क्लाइबर्न ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संख्या को तेरह न्यायाधीशों तक बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि विभिन्न दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। उनका तर्क है कि वर्तमान नौ सदस्यीय संरचना कई महत्वपूर्ण मामलों में पक्षपात को जन्म देती है और न्यायिक निर्णयों की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है। इस प्रस्ताव को कई लोकतांत्रिक समूहों ने समर्थन दिया है, जबकि कुछ रूढ़िवादी वर्ग ने इसे न्यायिक स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है।
पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिकी राजनीति में कई विवादास्पद घटनाएँ घटी हैं, जैसे मेघालय क्रिकेट संघ में अध्यक्ष जेम्स पी.के. संगमा के निर्णयों पर उठी तीखी आलोचना और शिलॉन्ग में संसद के पहले सत्र में जेम्स संगमा के शपथ ग्रहण की खबरें। इन घटनाओं ने राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज़ किया है, जिससे जेम्स क्लाइबर्न के इस बयान का प्रभाव और भी बढ़ गया है। उनका यह बयान न केवल न्यायिक नियुक्तियों पर पुनर्विचार को प्रेरित करेगा, बल्कि भविष्य में न्यायालय की संरचना में सुधार की दिशा में नई बहस को भी जन्म देगा।

