जर्मनी के बर्लिन के पास स्थित एक वन में सुरक्षा एजेंसियों ने कई पिस्तौलें बरामद कीं, जिन्हें रूसी खुफिया एजेंसियों द्वारा हत्याओं के लिए इस्तेमाल करने की संभावना जताई गई है। इस खोज को सुदेचे ज़ीटुंग ने शुक्रवार को प्रकाशित किया, जिसमें बताया गया कि ये हथियार गुप्त रूप से छिपाए गए थे और उनका उद्देश्य संभावित राजनीतिक या सामाजिक लक्ष्यों को निशाना बनाना था। इस प्रकार की गुप्त जमा पहले भी जर्मनी में देखी गई हैं, जैसे कि पिछले महीने स्टेड शहर में हुई गोलीबारी में भी विदेशी जासूसी के संकेत मिले थे।

रूसी दूतावास ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे हैं कि क्या यह घटना रूस के गुप्त संचालन का हिस्सा है। जर्मन सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि वे इस मामले की पूरी जांच कर रहे हैं और संभावित सहयोगियों को उजागर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ा रहे हैं। इस बीच, जर्मनी के पूर्वी भाग में हाल ही में हुई एक प्रदर्शनी में पूर्वी जर्मनी की कलाकार गाब्रिएले स्टॉटज़र की कृतियों को दिखाया गया, जो स्वतंत्रता और दमन के बीच के संघर्ष को दर्शाती है, और इस प्रकार इस क्षेत्र में सामाजिक तनाव की पृष्ठभूमि को उजागर करती है।

पिछले सप्ताह टुरा के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी गारो हिल्स में वन विभाग द्वारा एक लकड़ी मिल के पास की जांच में भी अनियमित गतिविधियों का पता चला था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वन क्षेत्रों में गुप्त संचालन की प्रवृत्ति बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन हथियारों का उपयोग किया गया तो यह जर्मनी की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसलिए, सरकार ने सुरक्षा उपायों को कड़ा करने और विदेशी जासूसी के खिलाफ कड़ी सजा की घोषणा की है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।