सैक्सनी-अन्हाल्ट राज्य में आयोजित चुनाव में दाहिनी‑अत्यंत दाहिनी पार्टी एएफडी ने प्रमुख जीत हासिल की, लेकिन वह पूर्ण बहुमत नहीं बना सका। इस परिणाम ने जर्मनी के भीतर और यूरोप के कई अन्य देशों में दाहिनी पार्टियों की संभावित उन्नति को उजागर किया। एएफडी की जीत को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि यह संकेत है कि कई मतदाता आर्थिक असुरक्षा और सामाजिक परिवर्तन के प्रति असंतोष के कारण दाहिनी विचारधारा की ओर झुक रहे हैं।

जर्मनी के प्रमुख राजनेता मर्ज़ ने इस जीत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को सुदृढ़ करना आवश्यक है और मतदान अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देना चाहिए। यह बात कांग्रेस द्वारा मतदान अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने की मांग से भी जुड़ी है, जहाँ जयराम रमेश ने इस दिशा में कदम उठाने की वकालत की थी। मर्ज़ ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विविध विचारों का समावेश ही उसकी शक्ति है, और किसी भी दाब या भय के माध्यम से इसे कमजोर नहीं किया जा सकता।

वर्तमान में यूरोप में कई देशों में चुनावी माहौल तीव्र हो रहा है, जहाँ स्वीडन, लातविया और बुल्गारिया जैसे देशों में भी आगामी चुनावों की तैयारी चल रही है। इस संदर्भ में जर्मनी की एएफडी जीत को एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि दाहिनी और अतिदाहिनी पार्टियों को रोकने के लिए लोकतांत्रिक संस्थानों को सुदृढ़ करना आवश्यक है। साथ ही, मतदान अधिकार की कानूनी स्थिति और उसकी सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज़ हो रही है, जैसा कि पिछले दिनों में प्रतिनिधि लोगों के अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत विश्लेषण किया गया था।