ज़ाग्रेब में आयोजित ग्रैंड चेस टूर के सुपर रैपिड एवं ब्लिट्ज चरण के पहले दिन, प्राग्नानंदा ने शीर्ष बीज विन्सेंट कीवमर के खिलाफ एक रोमांचक मुकाबला खेला। शुरुआती चालों में कीवमर ने बोर्ड पर दबाव बनाया और श्वेत राजा पर आक्रमण की संभावना जताई, जिससे प्राग्नानंदा को कठिन स्थिति का सामना करना पड़ा। परन्तु भारतीय ग्रैंडमास्टर ने धैर्यपूर्वक रक्षा करते हुए मध्य खेल में संतुलन स्थापित किया और धीरे-धीरे प्रतिपक्षी की कमजोरियों को उजागर किया।

मध्य खेल में प्राग्नानंदा ने एक सटीक बिशप की चाल के साथ कीवमर की योजना को बाधित किया और अपने मोहरों को सक्रिय किया। इस चरण में उन्होंने दो महत्वपूर्ण विनिमय किए, जिससे बोर्ड पर उनका नियंत्रण मजबूत हुआ। अंततः उन्होंने एक निर्णायक टैक्टिकल शॉट खेला, जिससे कीवमर का राजा असुरक्षित हो गया और अंततः हार माननी पड़ी। इस जीत ने प्राग्नानंदा को दो अंक दिलाए और उन्हें फाइनल में जगह दिलाई।

पिछले दिनों की रिपोर्टों में बताया गया था कि प्राग्नानंदा ने ज़ाग्रेब के पहले दिन में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था, जहाँ उन्होंने चार अंक जुटाकर संयुक्त द्वितीय स्थान हासिल किया था। उसी तरह, कीवमर ने भी अपने शुरुआती खेलों में मजबूत प्रदर्शन किया था, परन्तु इस फाइनल में उनका सामना प्राग्नानंदा की सटीक तैयारी और रणनीति से नहीं हो सका। इस जीत से भारतीय शतरंज को नई ऊर्जा मिली है और यह दर्शाता है कि युवा प्रतिभाएँ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कितनी प्रभावशाली हो रही हैं।