कर्नाटक के मुख्यमंत्री के.डी. शिवकुमार ने आज दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संघीय सरकार से दक्षिणी राज्यों को विकेंद्रीकरण और सीमा निर्धारण में न्याय की माँग की। उन्होंने कहा, "हम हमेशा अपना योगदान देते आए हैं, निर्माण करते आए हैं, और राष्ट्र को आगे बढ़ाते आए हैं। अब हमें भी उतनी ही देखभाल और समर्थन चाहिए जितना हम देते हैं।" इस बयान में उन्होंने दक्षिणी राज्यों के आर्थिक और सामाजिक योगदान को रेखांकित किया और समान संसाधन वितरण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

पिछले कुछ हफ्तों में उत्तर‑पश्चिम में एंडी बर्नहैम के नेतृत्व में विकेंद्रीकरण की नई पहल को तेज़ी मिली है। बर्नहैम ने ग्रेटर मैनचेस्टर में सार्वजनिक सेवाओं, बाल देखभाल और कौशल विकास के क्षेत्र में स्वायत्तता बढ़ाने की योजना पेश की थी, जिससे अन्य क्षेत्रों में भी समान मांगें उत्पन्न हुईं। शिवकुमार ने इस संदर्भ में कहा कि यदि उत्तर‑पश्चिम को नई शक्ति मिल रही है, तो दक्षिणी राज्यों को भी समान अवसर मिलने चाहिए, ताकि राष्ट्रीय संतुलन बना रहे।

शिवकुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायसंगत सीमा निर्धारण और वित्तीय स्वायत्तता के बिना किसी भी राज्य की प्रगति स्थायी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि संघीय सरकार को राज्य स्तर पर निर्णय लेने की शक्ति देना चाहिए, जिससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार नीतियां बन सकें। इस प्रकार, विकेंद्रीकरण और सीमा निर्धारण के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और आर्थिक संतुलन को सुदृढ़ किया जा सकता है।