कांग्रेस द्वारा विधान सभा और विधान परिषद में संवैधानिक पदों के लिए अपने नेताओं के नामों की घोषणा करने और इसे सार्वजनिक करने के निर्णय की आलोचना हो रही है। यह निर्णय विवादास्पद है और कई लोग इसका विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस के इस निर्णय को लेकर विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और उन्होंने इसे अनुचित बताया है।

कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यह निर्णय पार्टी के आंतरिक मामलों से संबंधित है और उन्हें इसके लिए किसी का अनुमोदन लेने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि यह निर्णय संवैधानिक पदों की गरिमा को कम करता है और इससे लोकतंत्र की धारा को नुकसान पहुंच सकता है।

इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बहस चल रही है और यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपने इस निर्णय पर कायम रहती है या नहीं। कांग्रेस के इस निर्णय का विरोध करने वाले दलों का कहना है कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे और कांग्रेस से जवाब मांगेंगे।