कोलकाता के फ्लोरेंस मैन्शन में पिछले सप्ताह एक घातक आग लगी, जिससे कई कमरे धधक उठे और अंधेरे में फँसे मेहमानों को बचाना मुश्किल हो गया। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि स्थानीय अग्निशमन दल को नियंत्रण में लाने में कई घंटे लगे, और इस दौरान कई लोग अपने जीवन की कीमत चुकाते रहे। रिपोर्टों के अनुसार, इमारत की सुरक्षा मानकों की अनदेखी, पुरानी विद्युत वायरिंग और असुरक्षित गैस कनेक्शन ने इस आपदा को जन्म दिया।

पश्चिम बंगाल में इस हफ्ते ही दो ऐसी ही घटनाएँ घटीं, एक कोलकाता में और दूसरी तारापीठ में, जहाँ कुल अठारह लोगों की जान गई। इन घटनाओं ने राज्य की अग्निशमन बुनियादी ढाँचे में गंभीर खामियों को उजागर किया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि उचित निरीक्षण, नियमित रखरखाव और आपातकालीन निकासों की उपलब्धता को लेकर नियमों का कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है। साथ ही, भ्रष्टाचार के कारण आवश्यक उपकरणों की कमी और प्रशिक्षण की कमी भी इस त्रासदी में योगदान देती है।

इन घटनाओं के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में योग दिवस मनाते हुए स्वास्थ्य और सुरक्षा के महत्व पर बल दिया था। उन्होंने कहा था कि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि सामाजिक जागरूकता भी बढ़ाता है, जिससे नागरिक आपातकालीन स्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। इस संदर्भ में, सरकार को न केवल योग को प्रोत्साहित करना चाहिए, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति भी समान रूप से सजग रहना चाहिए। भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए कड़े नियम, पारदर्शी निरीक्षण और जनता की जागरूकता आवश्यक है।