कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की वार्ता तीन दिनों तक बढ़ाई गई, परन्तु मध्यरात्रि की समय सीमा तक कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिकी प्रतिनिधियों ने अंतिम क्षण में कई शर्तों में बदलाव प्रस्तावित किए, जिन्हें कनाडा के प्रधान मंत्री मार्क कार्नी ने “अन्यायपूर्ण, आर्थिक रूप से अस्थिर और समझौते की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाने वाला” कहा। इस कारण दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में नई अनिश्चितता उत्पन्न हुई।

कार्नी ने स्पष्ट किया कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ़ को “डॉलर‑दर‑डॉलर” के आधार पर बराबर करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच मौजूदा टैरिफ़ अंतर को समाप्त किया जा सके। यह कदम अमेरिकी टैरिफ़ के ५० प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना को दर्शाता है, जो भारतीय निर्यातकों और अन्य वैश्विक व्यापारियों के लिए भी प्रभावशाली हो सकता है। पिछले वर्ष भारत‑कनाडा संबंधों में ऊर्जा विकल्पों पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई थी, परन्तु इस व्यापार टकराव से दोनों देशों के आर्थिक सहयोग पर असर पड़ सकता है।

पिछले महीनों में भारत‑कनाडा के बीच ऊर्जा सहयोग के कई समझौते हुए थे, जहाँ दोनों देशों ने आपसी भरोसे को बढ़ाने की कोशिश की। अब व्यापार टैरिफ़ के इस विवाद से दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर प्रश्न उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस टकराव को शीघ्रता से सुलझाया नहीं गया, तो यह न केवल दोनो देशों के व्यापार बल्कि वैश्विक बाजार में भी अस्थिरता पैदा कर सकता है।