केरल गृह विभाग ने भाजपा पार्षद आर. सुगाथन को अवकाश सुरक्षित करने के लिए उपयोग किए गए पत्र को वापस ले लिया है। यह पत्र 20 जुलाई को लिखा गया था और अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से एक अवर सचिव द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था। यह पत्र सुगाथन को 31 जुलाई को परिषद की बैठक में भाग लेने के लिए एक एस्कॉर्ट पैरोल के अनुरोध के जवाब में भेजा गया था।
इस पत्र को वापस लेने के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह माना जा रहा है कि यह राजनीतिक दबाव के कारण हो सकता है। सुगाथन ने इस पत्र का उपयोग अपने अवकाश को सुरक्षित करने के लिए किया था, लेकिन अब यह पत्र वापस ले लिया गया है।
केरल गृह विभाग के इस निर्णय का विपक्षी दलों ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि यह पत्र वापस लेना एक सही निर्णय है और इससे यह साबित होता है कि सरकार राजनीतिक दबाव में नहीं आती है। लेकिन भाजपा ने इस निर्णय की आलोचना की है और कहा है कि यह निर्णय पार्टी के खिलाफ है।
इस मामले में आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या सुगाथन को अपने अवकाश को सुरक्षित करने के लिए फिर से आवेदन करना होगा या सरकार उन्हें कोई विशेष व्यवस्था प्रदान करेगी? यह तो समय ही बताएगा।
