केरल में इस गर्मी के मौसम में तापमान लगातार ४० डिग्री से ऊपर पहुंच रहा है, जिससे घरों, व्यवसायों और औद्योगिक इकाइयों में बिजली की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए राज्य ने कई क्षेत्रों में नियोजित कटौती लागू की है, जिससे नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। ऊर्जा विभाग ने बताया कि लोड shedding के माध्यम से ही वर्तमान में ग्रिड को स्थिर रखा जा रहा है।

वहीं, इस वर्ष कमजोर मानसून के कारण राज्य के प्रमुख जलविद्युत बांधों में जलस्तर घट गया है, जिससे जलविद्युत उत्पादन में उल्लेखनीय कमी आई है। ऊर्जा मंत्री सनी जोसेफ़ ने कहा कि जलस्तर में गिरावट के कारण कई टर्बाइन पूर्ण क्षमता पर नहीं चल पा रहे हैं, जिससे कुल उत्पादन में लगभग पच्चीस प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। इस कारण से राज्य को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा।

पिछले कुछ हफ्तों में केरल में विभिन्न राजनीतिक घटनाओं ने भी इस ऊर्जा संकट को उजागर किया है; भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा बाल शोषण के आरोपों पर विरोध प्रदर्शन, ऑस्ट्रेलिया के संसद प्रमुख के सिलविगिरी मठ का दौरा, तथा युवा कांग्रेस द्वारा नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में सरकार से जवाबदेही की मांग। इन घटनाओं ने सरकार पर ऊर्जा सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों दोनों में त्वरित कार्रवाई करने का दबाव बढ़ा दिया है। अब सरकार को न केवल तत्काल बिजली कटौती को नियंत्रित करना है, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा योजना में नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा देना होगा।