केरल में एचआईवी के प्रति भय अब पहले जैसा नहीं रहा। प्रारम्भिक वर्षों में एचआईवी संक्रमण को लेकर जनसंख्या में गहरा डर था, जिससे लोग सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाते थे। लेकिन समय के साथ इस रोग की उपचार क्षमता में सुधार और दवाओं की उपलब्धता ने डर को कम कर दिया है, जिससे कई युवा अब जोखिम भरे व्यवहार में लिप्त हो रहे हैं।
इस बदलाव के परिणामस्वरूप यौन संचारित रोगों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। केरल राज्य एआईड्स नियंत्रण समाज के अधीन २३ जिलाई यौन संचारित रोग/रोगजन्य संक्रमण केंद्रों में रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी के डर के घटने से युवा सुरक्षित कंडोम उपयोग और नियमित जांच को कम महत्व दे रहे हैं, जिससे अन्य रोगों का प्रसार तेज हो रहा है।
सितंबर के चौथे दिन विश्व यौन स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य प्राधिकरणों ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित ग़लत जानकारी, पाठ्यपुस्तक त्रुटियों और राजनीतिक पोस्टरों जैसी बाहरी प्रभावों को भी ध्यान में रखा गया है, क्योंकि ये सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संदेश को भ्रमित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का आग्रह है कि युवा वर्ग को सही जानकारी प्रदान कर सुरक्षित यौन व्यवहार को प्रोत्साहित किया जाए।

