केसी (एम) के प्रमुख मणि ने आज एलडीएफ के भीतर उपविपक्ष नेता पद को लेकर बढ़ते झगड़े पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गठबंधन को अब आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और अपनी कमियों को दूर करने के लिए मिलजुल कर काम करना चाहिए, न कि पदों के लिए आपस में लड़ना चाहिए। मणि ने यह भी याद दिलाया कि पिछले विधानसभा चुनाव में १.९ करोड़ मतदाताओं ने इस गठबंधन को अस्वीकार कर दिया था, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि जनता अब आंतरिक विवादों से थक चुकी है।
पिछले कुछ हफ्तों में कई राज्य स्तर की राजनीतिक घटनाएँ भी इस बात को रेखांकित करती हैं कि गठबंधन के भीतर एकजुटता कितनी आवश्यक है। महाराष्ट्र में सचिन अहिर ने शिंदे के साथ मिलकर महायुति के उम्मीदवार के रूप में उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दायर किया, जबकि राजौरी में चार विधायक ने उपमुख्य मंत्री के खिलाफ असमान विकास निधि वितरण का आरोप दोहराया। इसी प्रकार, मणिपुर में केएचआईपीसी ने उपमुख्य मंत्री नेमचा किपगेन के इस्तीफे की मांग की, जिससे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी। इन घटनाओं ने एलडीएफ को यह समझाने की जरूरत पैदा की कि आंतरिक मतभेदों को सुलझाकर ही वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
मणि ने एलडीएफ को आग्रह किया कि वे इस चेतावनी को गंभीरता से लें और उपविपक्ष नेता पद को लेकर होने वाले विवादों को तुरंत समाप्त करें। उन्होंने कहा कि यदि गठबंधन अपने भीतर की समस्याओं को सुलझा लेगा तो आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सकेगा। अंत में, मणि ने सभी दलों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करें और जनता के हित में मिलकर काम करें, ताकि राष्ट्रीय राजनीति में स्थिरता और विकास सुनिश्चित हो सके।

