केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना के प्रारंभिक कार्य को स्थगित करने का औपचारिक निर्णय लिया है। इस निर्णय का मुख्य कारण स्थानीय समुदायों—विशेषकर मेइती, पंगाल और नागा—की राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण के अद्यतन की मांग थी, जिसे जनगणना से पहले पूरा करना आवश्यक माना गया। सरकार ने कहा कि पंजीकरण में सुधार के बिना जनगणना के आंकड़े विश्वसनीय नहीं रहेंगे, इसलिए समय निकालकर इस प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जाएगा।
जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख में हाल ही में प्रथम चरण की घर‑सूची कार्यवाही सफलतापूर्वक पूरी हुई, जहाँ 6.67 लाख घरों ने स्वयं‑गणना का विकल्प चुना। इस सफलता ने राष्ट्रीय स्तर पर जनगणना के महत्व को पुनः स्थापित किया, परन्तु मणिपुर में सामाजिक विविधता और ऐतिहासिक विवादों को देखते हुए समान प्रक्रिया को तुरंत लागू करना कठिन माना गया। पिछले रिपोर्टों में बताया गया था कि दक्षिण कश्मीर में भी घर‑सूची कार्य में प्रगति हुई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न क्षेत्रों में अलग‑अलग चुनौतियाँ मौजूद हैं।
स्थगन के बाद केंद्र ने मणिपुर के सभी प्रमुख समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण को अद्यतन करने के लिए एक समन्वित योजना तैयार की जा सके। इस प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकार और केंद्र के जनगणना अधिकारी मिलकर काम करेंगे, जिससे भविष्य में जनगणना के आंकड़े सभी वर्गों के लिए समान रूप से प्रतिबिंबित हों। अंततः, यह कदम मणिपुर में सामाजिक शांति को बनाए रखने और राष्ट्रीय आँकड़ों की विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

