केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने हाल ही में एक प्रमुख सुरक्षा एजेंसी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिससे देश के संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन विरोधी कौशल को उन्नत किया जाएगा। इस समझौते के तहत विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, उन्नत जाँच उपकरण और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे हवाई खतरों का सामना करने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
पिछले कुछ हफ्तों में सीआईएसएफ के कई कर्मियों को विभिन्न दुर्घटनाओं में चोटें आईं, जैसे तेल संयंत्र में अनजाने में बंदूक चलने से जख्मी होना, जम्मू‑कश्मीर में बस दुर्घटना में कई अधिकारी घायल होना आदि। इन घटनाओं ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को पुनः मूल्यांकन करने की आवश्यकता को उजागर किया, और अब ड्रोन जैसी नई तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
ड्रोन का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है, विशेषकर एयरोस्पेस, परमाणु ऊर्जा और तेल‑गैस क्षेत्रों में। इस समझौते के माध्यम से सीआईएसएफ के कर्मियों को आधुनिक ड्रोन पहचान, जाम करने और निष्क्रिय करने की तकनीकें सिखाई जाएँगी, जिससे भविष्य में संभावित हवाई हमलों को रोका जा सकेगा। यह पहल न केवल सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी, बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

