कावेरी नदी के दोनों तटों पर इस वर्ष के कमजोर मानसून ने किसानों को गंभीर दुविधा में डाल दिया है। कर्नाटक में कई खेतों में जल स्तर घटने से फसल की पैदावार पर असर पड़ा है, जबकि तमिलनाडु में धान के विस्तृत खेतों में पानी की कमी के कारण फसल नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। दोनों राज्यों के जल विभागों को अब जल वितरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए कठिन निर्णय लेने पड़ रहे हैं।

पिछले हफ्तों में देश के विभिन्न हिस्सों में जल संबंधी समस्याओं ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। 27 जून को श्रीनगर में हल्की बारिश ने पुराने जल निकासी तंत्र की खामियों को उजागर किया, जिससे कई सड़कों पर जलभराव हुआ। इसी प्रकार 28 जून को कश्मीर में गर्मी की पहली बड़ी लहर ने जल संसाधनों की कमी को और स्पष्ट कर दिया। इन घटनाओं ने जल प्रबंधन की नीतियों में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया।

कर्नाटक‑तमिलनाडु के बीच जल विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों को पारस्परिक समझौते और वैज्ञानिक आधार पर जल वितरण की योजना बनानी होगी। साथ ही, जल संरक्षण के उपायों को अपनाते हुए किसानों को सूखे‑रोधी फसलों की ओर प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इस दिशा में राष्ट्रीय जल नीति को सुदृढ़ करना और स्थानीय स्तर पर जल संचयन के प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से लागू करना ही समाधान हो सकता है।