राज्य में कावेरी व अमरावती नदियों के तल पर अवैध रेत खनन को लेकर पर्यावरण संगठनों ने पहले तीव्र विरोध किया था। उन्होंने बताया था कि ३० से अधिक स्थानों पर अनधिकृत खनन से नदी की धारा बिगड़ रही है और स्थानीय जीव-जंतुओं को खतरा है। नई सरकार के आने के बाद, जल संसाधन विभाग ने विशेष निगरानी इकाइयाँ स्थापित कीं और स्थानीय प्रशासन को सख्त निर्देश दिए।

इन उपायों के फलस्वरूप, पिछले दो हफ्तों में जगतसिंघपुर जिले में ४ करोड़ रुपये मूल्य की अवैध रेत जब्त की गई, जिससे इस क्षेत्र में खनन पर कड़ी रोक लग गई। इसी दौरान ओडिशा के सुंदरगढ़ में अनधिकृत मैंगनीज खनन के कारण जमीन ढह कर एक नाबालिग की मृत्यु और एक अन्य की गंभीर चोटें आईं, जिससे इस प्रकार के अपराधों के प्रति सतर्कता बढ़ी।

अब राज्य सरकार ने कहा है कि अवैध खनन के मामलों में शिकायतों की गिरावट केवल कड़े कानूनों का परिणाम नहीं, बल्कि जनता की जागरूकता और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता का भी परिणाम है। भविष्य में भी जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए निरंतर निगरानी और सख्त दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाएंगे, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे।