त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री मणिक सारकार ने आज एक सार्वजनिक मंच पर स्वास्थ्य और शिक्षा के आपसी निर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर के बिना शिक्षा का पूर्ण लाभ नहीं उठाया जा सकता, और इसी प्रकार शिक्षा के बिना स्वास्थ्य जागरूकता भी सीमित रहती है। इसलिए सरकार को दोनों क्षेत्रों में समान रूप से निवेश करना चाहिए।

हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन के बाद देश भर में लगभग एक लाख स्कूल बंद हो गए हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न हुई है। कई स्कूलों में तीसरी भाषा के नियम को लागू करने के लिए पर्याप्त तैयारी समय नहीं मिला, जैसा कि लोकसभा समिति ने पहले ही संकेत दिया था। इस कारण से शैक्षणिक प्रक्रिया में खलल पड़ा है और छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

साथ ही, जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख जैसे क्षेत्रों में शैक्षणिक प्रशासन में रिक्त पदों की समस्या भी उजागर हुई है, जहाँ आधे से अधिक प्रमुख पद खाली हैं। यह प्रशासनिक शून्य विद्यालयों की कार्यक्षमता को और घटा रहा है। मणिक सारकार ने इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार से आग्रह किया कि वे स्कूलों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति तेज़ करें और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ बनाएं, ताकि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में संतुलित विकास हो सके।