बेंगलुरु दक्षिण जिले के सभी तहसीलों में सौ से अधिक झीलें हैं, जिनमें अभी भी अधिग्रहण बना हुआ है। मैगड़ी तहसील को छोड़कर बाकी सभी में सफ़ाई कार्य में काफी देरी देखी गई है, जबकि मैगड़ी में २२० झीलों के सर्वेक्षण समाप्त हो चुके हैं और केवल पच्चीस झीलों में ही अधिग्रहण हटाना बाकी है। लोकायुक्त ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए पाँच तहसीलदारों को लिखित नोटिस जारी किया और शीघ्र कार्यवाही का आदेश दिया।
यह कदम राज्य सरकार की हालिया पहलों के साथ तालमेल रखता है। दो जुलाई को मुख्यमंत्री शिल्पकुमार ने बेंगलुरु दक्षिण में पत्थर की खदान के ध्वंस के बाद पूरे राज्य में खनन कार्यों की समीक्षा का आदेश दिया था, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों को प्राथमिकता मिली। इसी प्रकार केम्पेगौड़ा जयंती के अवसर पर बेंगलुरु में फूलों की श्रद्धांजलियों ने नागरिकों में स्थानीय विरासत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई। इन सभी घटनाओं से स्पष्ट है कि प्रशासन को पर्यावरणीय मुद्दों में सक्रिय और जवाबदेह रहना चाहिए।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई से उम्मीद की जाती है कि तहसीलदार जल्द ही अधिग्रहण हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाएँगे और झीलों को पुनः स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाया जाएगा। इससे न केवल जल संसाधनों की रक्षा होगी, बल्कि शहर के जलवायु संतुलन में भी सुधार आएगा। नागरिकों की आशा है कि भविष्य में ऐसी देरी नहीं होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी।

