पुने के बाहरी गाँव मंजरी में जनरेशन ज़ी के आदिवासी छात्र दो हफ्तों से भूख हड़ताल कर रहे हैं। वे राज्य सरकार से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक छात्रावास और नौ साल पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेशित रोजगार की पूर्ति की माँग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि वर्षों से उनकी आवाज़ अनसुनी रही है और अब वे अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इस कदम को आवश्यक मानते हैं।

पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान के लाहौर में एक ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से १४ स्कूल बच्चों की मृत्यु, सिड्डीपेट गाँव में आवारा कुत्तों द्वारा १० भेड़ों की हत्या और ५० अन्य जानवरों की चोट, तथा ओडिशा के बारिपाड़ा में एक पेड़ के नीचे ३० से अधिक विषैला साप के अंडे निकलना जैसी घटनाएँ सामाजिक असुरक्षा को उजागर करती हैं। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि कमजोर वर्गों को अक्सर सरकारी ध्यान नहीं मिलता, जिससे मंजरी के छात्रों की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।

सरकार ने अब तक इस हड़ताल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नौ साल पहले आदिवासी छात्रों के लिए रोजगार की गारंटी दी थी। छात्रों ने कहा कि यदि सरकार शीघ्रता से संवाद नहीं करेगी तो वे अपने संघर्ष को और तीव्र करेंगे। इस संघर्ष को देखते हुए कई सामाजिक संगठनों ने समर्थन व्यक्त किया है और सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की है।