मनव्वराली थंगल ने कंथापुरम ए.पी. अबूबकर मुस्लियार द्वारा जारी समस्त केरल जमीअतुल उलमा के परिपत्र को लेकर उत्पन्न विवाद को हल्के में लिया। इस परिपत्र में महलों और मदरासों को निर्देश दिया गया था कि सार्वजनिक धार्मिक समारोहों में महिलाओं की उपस्थिति न हो, जिससे कई धार्मिक संगठनों में असंतोष उत्पन्न हुआ। थंगल ने कहा कि यह मुद्दा अत्यधिक बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है और इसे संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।

केरल में हाल ही में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को सार्वजनिक अवकाश न देने के आरोपों से जुड़ी बहस ने इस विवाद को और जटिल बना दिया। एक स्थानीय विधायक ने नौका दौड़ के लिए अवकाश की मांग की, जिसे सतीशन ने संदर्भहीन कहा, जिससे राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर तनाव बढ़ा। इसी समय, इस्कॉन ने विदेश में रथ यात्रा आयोजित की, जबकि भारत में रथ यात्रा की तिथियों को लेकर बहस चल रही थी, जिससे धार्मिक आयोजनों की समय-सारणी पर प्रश्न उठे।

इन घटनाओं के बीच, ओडिशा राज्य में फिल्म पुरस्कारों को लेकर भी विवाद उत्पन्न हुआ, जहाँ कलाकारों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। यह सब दर्शाता है कि धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों में परिपत्र और निर्णयों का प्रभाव कितना व्यापक है। थंगल ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे आपसी समझ और सम्मान के साथ इस विवाद को सुलझाने का प्रयास करें, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।