अमेरिका के व्यापार प्रस्ताव में फ़्रेंच भाषा को एक "अवरोध" कहा गया, जिससे क्वेबेक के नागरिक अधिकारों को खतरा महसूस हुआ। मार्क कार्नी, जो वर्तमान में वित्तीय नीति प्रमुख हैं, ने स्पष्ट किया कि ऐसी शर्तें कनाडा के संवैधानिक सिद्धांतों के विरुद्ध हैं और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भाषा अधिकार केवल सांस्कृतिक प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का आधार हैं।
यह बयान कई हालिया घटनाओं के बीच आया है। केवल कुछ दिनों पहले, पियूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने नई व्यापार समझौते के प्रारंभिक चरण पर वार्ता शुरू की थी, जिसमें दोनों पक्ष आर्थिक लाभ की तलाश में थे। उसी समय, कनाडा की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका को 1-0 से हराकर इतिहास रचा, जिससे देश में राष्ट्रीय उत्साह का माहौल बना रहा। इन घटनाओं ने सरकार को आंतरिक और बाह्य दबावों के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती दी।
डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि कनाडा ने वर्षों से अमेरिका को नुकसान पहुँचाया है और यदि समझौता नहीं हुआ तो कारों और ट्रकों पर भारी शुल्क लगाएगा। इस प्रकार के आर्थिक दबाव के सामने, सरकार को भाषा संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक हितों को भी सुरक्षित रखना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कनाडा कठोर रुख अपनाता है, तो भविष्य में दो-तरफ़ा व्यापार संबंधों में पुनः वार्ता की संभावना बढ़ सकती है। इस स्थिति में राजनीतिक नेतृत्व की दृढ़ता और सार्वजनिक समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

