रैबीज़ रोग अत्यंत घातक है और इसका उपचार केवल समय पर सही वैक्सीन से ही संभव है। एक सच्चा, शक्तिशाली वैक्सीन तुरंत दिया जाए तो रोग को पूरी तरह रोका जा सकता है, जबकि नकली दवा से रोगी को सुरक्षा का भ्रम उत्पन्न हो जाता है और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। इस कारण से स्वास्थ्य प्राधिकरणों ने ‘अभयराब’ नामक नकली वैक्सीन बैच की गहन जांच शुरू कर दी है।
‘अभयराब’ बैच की पहचान कई रोगी केंद्रों में हुई, जहाँ रोगियों को वैक्सीन मिलने के बाद भी रैबीज़ के लक्षण विकसित हुए। इस बीच, कनाडा में एक बच्चा बैट के संपर्क में आने के बाद रैबीज़ से मर गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वैक्सीन की सच्चाई कितनी महत्वपूर्ण है। साथ ही, हालिया सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि एआई चैटबॉट उपयोगकर्ता अक्सर वैक्सीन संबंधी मिथकों में फँसते हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को अतिरिक्त खतरा उत्पन्न होता है। इन सभी घटनाओं ने नकली वैक्सीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता को और स्पष्ट किया है।
सरकार ने तुरंत इस बैच की आपूर्ति को रोक दिया और प्रभावित क्षेत्रों में वैक्सीन की पुनः जाँच का आदेश दिया। साथ ही, कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रथम समूह को भी स्वास्थ्य जांच के तहत रखा गया, ताकि यात्रा के दौरान कोई रोगी जोखिम में न पड़े। भविष्य में ऐसी घातक त्रुटियों से बचने के लिए वैक्सीन की आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और कड़ी निगरानी अनिवार्य की गई है।
