राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रमुख ने बताया कि नेपाल के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में दो नई हिमनदी झीलें और कई मोरैन बन चुके हैं। ये जलाशय बर्फ‑पत्थर भूस्खलन के मूल बिंदु पर उभरे हैं, जहाँ पहले भी बड़े पैमाने पर आपदा हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नई झीलों का अस्तित्व भविष्य में समान या अधिक विनाशकारी भूस्खलन की संभावना को बढ़ा सकता है।
वर्तमान में जल की मात्रा और जलस्तर के बारे में कोई ठोस डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि इस क्षेत्र में निरंतर निगरानी की सुविधा नहीं है। मौजूदा चेतावनी प्रणाली में तकनीकी सीमाएँ हैं, जिससे संभावित आपदा को समय पर पहचानना कठिन हो सकता है। इस कारण से स्थानीय प्रशासन को त्वरित उपाय करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, ताकि संभावित जोखिम को कम किया जा सके।
पिछले कुछ महीनों में इस प्रकार की भौगोलिक परिवर्तन के कई उदाहरण सामने आए हैं, जैसे कि टुमाक़ुरु में टैक्सी विस्फोट और हैदराबाद में नेपाली समुदाय के प्रति सामाजिक धारणाएँ। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक आपदाओं और सामाजिक प्रतिक्रियाओं दोनों को समझना आवश्यक है। अब नेपाल के अधिकारियों को चाहिए कि वे अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से विस्तृत सर्वेक्षण और सतत निगरानी प्रणाली स्थापित करें, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोका या कम किया जा सके।
