लुइज़ियाना में इमिग्रेशन एवं सीमा सुरक्षा (आईसीई) के अधिकारियों द्वारा मिलो यियानोपोलोस को गिरफ्तार कर यूके वापस भेजने के बाद, उन्होंने पियर्स मॉर्गन के यूट्यूब शो पर अपने भय और अपमान की भावना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह पहली बार था जब उन्हें 'वास्तव में बहुत डर' महसूस हुआ और यह अनुभव शारीरिक तथा मानसिक दोनों रूप से गिरावट वाला था। उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय प्रवासन नीतियों की कठोरता को उजागर करता है।
पिछले महीने एक दोषी लोगों के तस्कर को भी यूके में रहने के कारण निर्वासित किया गया था, जिससे तुर्की सरकार ने इसे राजनीतिक कारणों से किया कहा। यियानोपोलोस के निर्वासन को इसी प्रवृत्ति के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है, जहाँ विभिन्न देशों में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर प्रवासन निर्णयों को प्रभावित किया जा रहा है। इस प्रकार के मामलों से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव बढ़ता है और मानवाधिकार संगठनों की आलोचना भी तीव्र होती है।
इसी समय, पश्चिम एशिया में संघर्ष और एल नीनो की संभावित जोखिमों के कारण भारत ने अपने बैंकिंग क्षेत्र को समर्थन देने के लिए नई उपायों की घोषणा की है, जबकि जंतर mantar में धीरज से बैठकर विरोध करने वाले समूहों ने सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाई है। इन सभी घटनाओं का संगम यह दर्शाता है कि वैश्विक राजनीति, आर्थिक नीतियों और सामाजिक आंदोलन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं, और व्यक्तिगत मामलों जैसे यियानोपोलोस का निर्वासन भी इस बड़े परिप्रेक्ष्य में समझा जा सकता है।

