न्यू साउथ वेल्स के सार्वजनिक अभियोजन निदेशक सैली डाउलिंग ने बजट अनुमान सत्र में खुलासा किया कि उन्होंने राज्य के अटॉर्नी जनरल के साथ एक विस्तृत सूची पर चर्चा की थी, जिसमें उन वरिष्ठ बारिस्टरों के नाम शामिल थे, जिन्हें उनके कार्यालय के खिलाफ उठाए गए विवादास्पद निष्कर्षों की स्वतंत्र समीक्षा के लिये नियुक्त किया जा सकता था। यह चर्चा तब हुई जब एक राज्य संसद समिति ने 4-3 के मत से यह पाया कि डाउलिंग ने रेडियो स्टेशन 2GB को एक कहानी प्रस्तुत करने के संबंध में झूठी गवाही दी थी, जिसमें एक आदिवासी बच्चे द्वारा अदालत में देशभक्ति अभिव्यक्ति का उल्लेख था।
समिति की रिपोर्ट के बाद अटॉर्नी जनरल ने एक ऐसे वरिष्ठ वकील को नियुक्त करने का निर्णय लिया, जिससे डाउलिंग का पेशेवर और सामाजिक संबंध लगभग तीस वर्षों से था। इस नियुक्ति को लेकर कई कानूनी विशेषज्ञों ने प्रश्न उठाए, क्योंकि इससे जांच की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हो सकता है। डाउलिंग ने कहा कि वह इस नियुक्ति को लेकर कोई आपत्ति नहीं रखती, परन्तु सार्वजनिक भरोसे को बनाए रखने के लिये पारदर्शिता आवश्यक है।
इस विवाद को समझने के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समान मामलों की तुलना करना उपयोगी है। उदाहरण के तौर पर, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के मुख्य अभियोजक करिम खान को यौन दुराचार के आरोपों के कारण निलंबित किया गया था, जबकि उन्होंने लगातार इन आरोपों को खारिज किया। इसी प्रकार, भारतीय सेना में जनरल उपेंद्र द्विवेदी से जनरल धीरज सेठ को कमान सौंपने की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के मुद्दे उठे। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों की नियुक्तियों में निष्पक्षता और सार्वजनिक भरोसा बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।

