शिवमोगा के एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र में न्यायाधीश नागमोहन दास की नई पुस्तकों का विमोचन हुआ, जिसमें राज्य के प्रमुख मंत्री ने उपस्थित होकर उनके योगदान को सराहा। मंत्री ने कहा कि दास जी ने सेवानिवृत्ति के बाद भी संविधान की महत्ता को जनता तक पहुँचाने के लिए ‘संविधान ओडु’ अभियान में सक्रिय भाग लिया, जिससे आम नागरिकों में संवैधानिक अधिकारों की समझ में वृद्धि हुई।

यह कार्यक्रम न्यायिक सुधारों के व्यापक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना गया। केवल कुछ दिनों पहले न्यायाधीश नरसिम्हा को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में पाँचवें वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया, जिससे न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस प्रकार, न्यायिक संस्थानों की सक्रिय भूमिका को जनता के सामने लाने के प्रयासों को एकजुट किया गया।

इसी दौरान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी न्याय और मानवाधिकारों से जुड़ी घटनाओं पर चर्चा हुई, जैसे कि टेक्सास में नन की रिहाई और अमेरिकी न्यायालय द्वारा गौतम अडानी के धोखाधड़ी मामले को वापस लेने के कारणों की मांग। इन घटनाओं ने न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों को उजागर किया, जो दास जी के कार्यों के साथ सामंजस्य स्थापित करता है। इस प्रकार, शिवमोगा में आयोजित इस समारोह ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर संवैधानिक जागरूकता को सुदृढ़ करने का संदेश दिया।