रूस के प्रशांत बेड़े ने इस गुरुवार को कुरील द्वीपसमूह के सबसे बड़े द्वीप एतोरोफ़ु से बस्तियन सतह‑से‑जहाज मिसाइलें लॉन्च कीं, जिससे लगभग तीन सौ किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य पर सटीक प्रहार हुआ। इस अभ्यास को रूस ने शत्रु जहाजों पर संभावित हमले का अनुकरण बताया, जबकि जापान ने इसे अपने उत्तर क्षेत्रों पर सीधे हमला मानते हुए कड़ी निंदा की।

जापान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार के सैन्य अभ्यास से द्वीप विवाद में तनाव और बढ़ेगा, और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन होगा। पुतिन की हालिया द्वीप यात्रा के बाद इस तरह के कदम ने दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और बिगाड़ दिया है। इस बीच, चीन ने परमाणु हथियारों पर खर्च में रिकॉर्ड ऊँचाई हासिल की है, जिससे वैश्विक सुरक्षा माहौल और अधिक अस्थिर हो गया है।

डेनमार्क ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से अपने क्षेत्रों ग्रीनलैंड और फ़रो द्वीपों को स्वतंत्र ओलंपिक टीम के रूप में मान्यता देने की मांग की है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर छोटे राष्ट्रों की पहचान की लड़ाई को दर्शाता है। इसी तरह, भारत के तेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय कंपनियां रूस को सीधे ईंधन नहीं बेच रही हैं, जिससे रूस‑भारत आर्थिक संबंधों में जटिलता स्पष्ट हुई। इन सभी घटनाओं के प्रकाश में, रूस के मिसाइल परीक्षण को केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन के पुनःआकलन के रूप में देखा जा रहा है।