ऑस्ट्रेलिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार के साथ डेटा केंद्रों की योजना तेज़ी से आगे बढ़ रही है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां आगामी नियामक प्रतिबंधों से बचने के लिए अगले कुछ महीनों में अनुमोदन प्राप्त करने की कोशिश कर रही हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि इन केंद्रों को नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र और जल उपयोग को सीमित करने वाले नियमों से पहले स्थापित किया गया तो बिजली की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई की दर में इज़ाफ़ा हो सकता है।

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़े ने राष्ट्रीय मंत्रिपरिषद के साथ इस विषय पर चर्चा करने का इरादा व्यक्त किया है। वे चाहते हैं कि डेटा केंद्रों के लिए फेडरल नियमों में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और जल संरक्षण को अनिवार्य किया जाए। इसी तरह भारत में भी पर्यटन के बढ़ते दबाव से देहरादून‑मसूरी मार्ग पर भारी ट्रैफ़िक जाम और सोने की कीमतों में स्थिरता के कारण पुराने सोने की बिक्री में उछाल देखा गया, जो बुनियादी ढाँचे पर दबाव के समान संकेत देते हैं।

यदि नियामक ढांचा समय पर लागू नहीं हुआ तो डेटा केंद्रों की तेज़ी से निर्माण आवासीय भूमि की उपलब्धता को घटा सकता है और आर्थिक असंतुलन पैदा कर सकता है। इसलिए कई पर्यवेक्षक एक मोरेटोरियम की मांग कर रहे हैं, जिससे सभी हितधारकों को नियमों की पूरी समझ और उचित संतुलन स्थापित करने का समय मिल सके। अंततः, सतत ऊर्जा समाधान और जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए नीति निर्माताओं को आर्थिक विकास और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना आवश्यक होगा।