ऑस्ट्रेलिया के वर्गीकरण बोर्ड ने हाल ही में हैलोवीन: द गेम को वर्गीकृत नहीं करने का निर्णय लिया, जिससे यह खेल देश में बिक्री और वितरण से प्रतिबंधित हो गया। बोर्ड ने बताया कि खेल में नशे के सेवन को प्रोत्साहित करने वाले तत्व मौजूद हैं, जैसे कि खिलाड़ियों को वर्चुअल ड्रग उपयोग के माध्यम से अंक प्राप्त करने की सुविधा। इस कारण से खेल को 'अस्वीकृत' कर दिया गया, जबकि हिंसा या रक्तपात को मुख्य कारण नहीं माना गया।

यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चर्चा का विषय बन गया, विशेषकर जब चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने २२-२३ जून को दिल्ली का दौरा किया और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन की कूटनीतिक नीतियों की परीक्षा हुई। उसी समय, जम्मू और कश्मीर में डॉ. फारूक ने अंतर्राष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस पर नशा के दुरुपयोग के खिलाफ एकजुटता का आह्वान किया, और शिलांग में शंकर ने बाइक रैली के माध्यम से नशा विरोधी जागरूकता फैलायी। इन घटनाओं ने नशा नियंत्रण के महत्व को उजागर किया, जिससे हैलोवीन गेम के प्रतिबंध को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रतिबंधों से खेल उद्योग में मानकों की स्पष्टता आएगी और भविष्य में नशा प्रचारक सामग्री को रोकने के लिए सख्त नियम लागू होंगे। ऑस्ट्रेलिया के वर्गीकरण बोर्ड के पूर्व निदेशक ने कहा कि यह निर्णय एक असंगत मानक प्रणाली को उजागर करता है, जहाँ कुछ देशों में हिंसा को प्रतिबंधित किया जाता है, जबकि नशा के प्रोत्साहन को अनदेखा किया जाता है। इस प्रकार, हैलोवीन: द गेम का प्रतिबंध न केवल एक खेल को प्रभावित करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी प्रयासों के साथ भी जुड़ता है।