कोयंबत्तूर के 25 वर्षीय रथनवेल ने अपने जीवन का सबसे बड़ा दिन मनाया जब उन्होंने 99वां जूनियर ग्रैंडमास्टर खिताब जीता। यह उपलब्धि उन्हें भारत के ग्रैंडमास्टर शतक की ओर कदम बढ़ाने का मौका देती है। रथनवेल ने 2022 में अपने तीन जूनियर ग्रैंडमास्टर नॉर्म पूरे किए थे, लेकिन लगातार रेटिंग की आवश्यकता पूरी करने में असफल रहे, जिससे अंतिम कदम की जगह एक लंबी परीक्षा बन गई।

उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण के परिणामस्वरूप यह उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय शतरंज की दुनिया में एक नया अध्याय खोला है। रथनवेल की इस उपलब्धि को देखते हुए, भारतीय शतरंज के प्रशंसकों को उम्मीद है कि जल्द ही भारत ग्रैंडमास्टर शतक की ओर कदम बढ़ाएगा।

रथनवेल की इस उपलब्धि के बाद, भारतीय शतरंज की दुनिया में एक नई उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय शतरंज के प्रशंसकों को उत्साहित किया है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही भारत ग्रैंडमास्टर शतक की ओर कदम बढ़ाएगा।